भारतीय संस्कृति में गाय को सिर्फ एक पशु नहीं, बल्कि 'माता' का दर्जा दिया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे गहरा विज्ञान भी है?
1. सूर्यकेतु नाड़ी का विज्ञान
देसी गाय की पीठ पर जो कूबड़ (Hump) होता है, उसमें 'सूर्यकेतु नाड़ी' होती है। यह सूर्य की किरणों को सोखकर दूध में स्वर्ण क्षार (Gold Salts) बनाती है। यही कारण है कि देसी गाय का दूध हल्का पीला और अमृत समान होता है।
2. ऑक्सीजन का स्रोत
वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि देसी गाय एकमात्र ऐसा प्राणी है जो सांस छोड़ते समय भी वातावरण को शुद्ध करती है। इसके गोबर में हैजा और टीबी के कीटाणुओं को नष्ट करने की क्षमता होती है।
निष्कर्ष: हमें जर्सी या विदेशी नस्ल के बजाय अपनी भारतीय नस्लों (जैसे गिर, साहीवाल, केनकथा) का पालन करना चाहिए।